Sunday, August 25, 2013



किस से कहूँ , क्या कहूँ ,क्या न कहूँ

तू ठहर ,अभी रुक जरा

कर अभी इन्तेजार

बीत गए जब दिन तो क्या न बीतेंगी रातें?

बस एक पल और -

छट जायेगा अँधियारा

आयेगा नया प्रकाश नया सवेरा

ये जो बस तिनके हैं और खड़े तनके हैं

सब ढह जायेंगे उस पल

कर अभी इन्तेजार......

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