Tuesday, December 30, 2014

नव वर्ष की पूर्व संध्या

समय बीतते कहाँ लगता है देर
बस एक ही वर्ष तो बीता है…
बस एक ही ?
क्यों लगता है युग बीता, सदियाँ बीतीं
तुम सिर्फ तुम
मैं सिर्फ मैं
जानते हैं क्यों है यह एक युग एक सदी
चलो………..अब
न तुम सिर्फ तुम रहोगे
न मैं सिर्फ मैं
एक नया सवेरा, नया जीवन, नई आकांक्षाएं
नए रूप, नए सपने……
नया तुम ,नया मैं
बाकि सब?
वो सब वही पुराने, घिसे पीटे

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